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संतो की शिक्षा

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                                   संतो की शिक्षा एक गांव का व्यक्ति पहली बार श्री नानक देव जी के पास गया उसने देखा कि संत जी मायूस अवस्था में एकांत में बैठे थे (स्मरण कर रहे थे) उस आदमी ने सतनाम वाहेगुरू बोला श्री नानक जी ने भी उत्तर दिया भोजन करवाया ज्ञान विचार सुनाए वह व्यक्ति चला गया 1 दिन फिर वहीं व्यक्ति आया और बोला महाराज जी आप कभी खूश दिखाई नहीं देते क्या कारण हैं संत नानक जी ने कहा कि ना जाने काल की कर डारे किस विधि ढल जा पासा वे। जीन्हाते सिर ते मौत  खुडकदी उन्हानू केहडा हासा वे।। जब मेरे शिष्य सत्संग सुनने आते हैं तो साद संगत को देखकर मेरे को खुशी होती हैं कि सब भक्ति पर लगे हैं कोई विचलित नहीं हुआ जब यह सत्संग के पश्चात जाते हैं तो मायूसी छा जाती हैं कि कहीं कोई सिरफिरा इन को भ्रमित करके परमात्मा से दूर ना कर दें श्री नानक जी ने कहा कि ज्ञानहीन संतों ने भक्ति को कठिन बना दिया है वे पूर्ण मोक्ष मार्ग जनते नहीं भ्रमित करने को गुरु बने हैं जो मीठी मीठी बातें बना कर मे...

संतो की शिक्षा

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                          संतो की शिक्षा आज कलियुग में भक्त समाज के सामने संत की पहचान करना सबसे जटिल प्रश्न बना हुआ है। लेकिन इसका बहुत ही लघु और साधारण–सा उत्तर है कि जो गुरु शास्त्रो के अनुसार भक्ति करता है और अपने अनुयाईयों अर्थात शिष्यों द्वारा करवाता है वही पूर्ण संत है। चूंकि भक्ति मार्ग का संविधान धार्मिक शास्त्र जैसे – कबीर साहेब की वाणी, नानक साहेब की वाणी, संत गरीबदास जी महाराज की वाणी, संत धर्मदास जी साहेब की वाणी, वेद, गीता, पुराण, कुरआन, पवित्र बाईबल आदि हैं। जो भी संत शास्त्रो के अनुसार भक्ति साधना बताता है और भक्त समाज को मार्ग दर्शन करता है तो वह पूर्ण संत है अन्यथा वह भक्त समाज का घोर दुश्मन है जो शास्त्रो के विरूद्ध साधना करवा रहा है। इस अनमोल मानव जन्म के साथ खिलवाड़ कर रहा है। ऐसे गुरु या संत को भगवान के दरबार में घोर नरक में उल्टा लटकाया जाएगा। उदाहरण के तौर पर जैसे कोई अध्यापक सलेबस (पाठयक्रम) से बाहर की शिक्षा देता है तो वह उन विद्यार्थियों का दुश्मन है।       ...

संतो की शिक्षा

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                        संतो की शिक्षा                   www.jagatgururampalji.org             संतों की शिक्षा से ही होगा मानव कल्याण