संतो की शिक्षा

          
                       संतो की शिक्षा



एक गांव का व्यक्ति पहली बार श्री नानक देव जी के पास गया उसने देखा कि संत जी मायूस अवस्था में एकांत में बैठे थे (स्मरण कर रहे थे) उस आदमी ने सतनाम वाहेगुरू बोला श्री नानक जी ने भी उत्तर दिया भोजन करवाया ज्ञान विचार सुनाए वह व्यक्ति चला गया 1 दिन फिर वहीं व्यक्ति आया और बोला महाराज जी आप कभी खूश दिखाई नहीं देते क्या कारण हैं संत नानक जी ने कहा कि


ना जाने काल की कर डारे किस विधि ढल जा पासा वे। जीन्हाते सिर ते मौत  खुडकदी उन्हानू केहडा हासा वे।।

जब मेरे शिष्य सत्संग सुनने आते हैं तो साद संगत को देखकर मेरे को खुशी होती हैं कि सब भक्ति पर लगे हैं कोई विचलित नहीं हुआ जब यह सत्संग के पश्चात जाते हैं तो मायूसी छा जाती हैं कि कहीं कोई सिरफिरा इन को भ्रमित करके परमात्मा से दूर ना कर दें श्री नानक जी ने कहा कि ज्ञानहीन संतों ने भक्ति को कठिन बना दिया है वे पूर्ण मोक्ष मार्ग जनते नहीं भ्रमित करने को गुरु बने हैं जो मीठी मीठी बातें बना कर मेरे भक्तों को काल के जाल में ले जाते हैं इसलिए जब तक वह पुनः सत्संग में जब नहीं आते तो मुझे चिंता बनी रहती है सब आ जाते हैं तो खुशी हो जाती हैं परंतु हम नाचते गाते नहीं दिल में महसूस करते हैं मौत को कभी नहीं बुलते



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