मानव समाज सुखी केसे हो





 जब तक सच्चे सतगुरु के सत्संग के विचार सुनने को नहीं मिलते तो भूलवश मानव अहंकार में जीता है। सच्चे सतगुरु के सत्संग से पता चलता है कि परमात्मा अहंकार से कोसों दूर है। और इस मनुष्य शरीर का सदुपयोग कैसे करना चाहिए ये भी सत्संग में ही पता चलता है। 





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